राज कुमार संतोषी का कम बैक 'बैड बॉय' के सहारे - DIGITAL CINEMA

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राज कुमार संतोषी का कम बैक 'बैड बॉय' के सहारे


राजकुमार संतोषी ने  "घायल", "दामिनी" "घातक", "चाइना गेट" से एक  फाइटर फिल्म डायरेक्टर की जो बोनाफाइड इमेज बनाई थी, वह अजब गजब करतब दिखाने के चक्कर में बिगाड़ दी। "पुकार" और "लज्जा" अच्छी विषय वस्तु के बावजूद इनकी लेखकीय दुविधा का शिकार हो गई। पटकथा लिखते वक्त सहज स्वाभाविक प्रवाह रोककर तथ्य को अपने कथ्य से दबोचने की गलती कर दी। निर्देशक के रूप में अपनी शैली, सोच थोपने में भटक गए। ये भटकाव तभी दीखने लगा था जब राजकुमार संतोषी "जानम समझा करो", "दिल है तुम्हारा" जैसी फिल्में लिखने में रुचि लेने लगे थे। इसका प्रभाव दिखा। "द लीजेंड ऑफ भगत सिंह" बायोपिक होने से बच गई, पर, "फैमिली" उनकी "यूनिक थॉट" का शिकार हो ही गई।
"खाकी" और "हल्ला बोल" अच्छी होती हुई भी बोझिल थीं और प्रवाह रुका रुका था। फिर आया अजब गजब का मौसम। संतोषी ने बता दिया कि वह थक चुके हैं, अपने प्रयोगों से स्वयं ही बोर हो चुके हैं, अब जो भी उलजलूल परोस रहे हैं, ग्रहण कीजिए, प्लीज। फिर होना तो कुछ वैसा ही था कि पोस्टर फटते ही उनके कैरियर को ही ग्रहण लग गया,निकला एक बिग ज़ीरो, वह भी बेडौल। लोग तो यहां तक शक़ करने लगे कि 'अंदाज अपना अपना'भी प्रियदर्शन या अन्य दक्षिणी फिल्मकार की पुरानी फिल्मों से छाप मारा होगा। 
                    अब सीधे वर्तमान परिप्रेक्ष्य में  बात करते हैं। यह 'बैड बॉय' सीधे प्रायोजित कार्यक्रम है। मिमोह के कैरियर से मोहभंग होने के पश्चात मिथुन चक्रवर्ती अपने कनिष्ठ सुपुत्र नामाषि चक्रवर्ती को ज़रा ढंग से इन्ट्रोड्यूस करना चाहते थे, सो, क्यों न एक स्थापित डायरेक्टर को लिया जाये ! संतोषी को लेने की यही अंतर्कथा है। साजिद कुरैशी को भी अपनी बेटी अमरीन को हीरोइन बनाने की इच्छा थी, तो ये संयोग बना दिया गया। अब यह फिल्म इन दोनों बच्चों के भविष्य का निर्धारण तो करेगी ही, राज कुमार संतोषी के लिए भी यह लिटमस टेस्ट होगा क्योंकि आगे है एक धूम धड़ाकेवाली फिल्म 'बैटल ऑफ सारागढ़ी' तो दीपावली तक कीजिए प्रतीक्षा।



  ◆ उमेश सिंह चंदेल



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