किन्नरों की व्यथा को दर्शाती हिन्दी फिल्म-‘हंसा-एक संयोग' - DIGITAL CINEMA

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किन्नरों की व्यथा को दर्शाती हिन्दी फिल्म-‘हंसा-एक संयोग'


चित्रगृही फिल्म्स कृत चर्चित हिन्दी फिल्म  ‘हंसा-एक संयोग’ सर्वत्र रिलीज हो चुकी है।प्रदर्शन के बाद इस फिल्म की रिपोर्ट काफी अच्छी है।किन्नरों की व्यथा को दर्शाती इस फिल्म के निर्माता हैं सुरेश शर्मा  तथा  निर्देशक  द्वय  हैं  संतोष  कश्यप  व  धीरज  वर्मा।  लेखक  संतोष  कश्यप, एडीटर  जे.डी.  सिंह,  गीतकार  धीरज  कुमार,  संतोष  कश्यप  व  धीरज  वर्मा  हैं। संगीतकार  ललित  मिश्रा  व  प्रखर  वर्मा  हैं।  कोरियोग्राफर  लाॅन्गिनस  फर्नांडीस  व तेजस दत्तानी हैं। प्रोडक्शन मैनेजर साल्वी पदायची, मार्केटिंग मैनेजर सुजीत बंगेरा है। फाईट मास्टर इकबाल तथा डी.ओ.पी. अरविन्द के. हैं। सह-निर्माता हैं वरुण शर्मा,  डी.  चंद्राकर,  मनु  श्रीवास्तव  और  आर.  सुशील  गार्गी।  इस  फिल्म  के  मुख्य कलाकार हैं-शरत सक्सेना, सयाजी शिन्दे, अखिलेन्द्र मिश्रा, आयुष श्रीवास्तव, मंत्रा पटेल, दीपशिखा नागपाल, अमन वर्मा, इश्तियाक खान, पंकज अवधेश शुक्ला, बच्चन पचेरा, पम्मी मोटन, राम सिंह, गोपाल सिंह, मा. आयुष चंद्राकर, वैष्णवी मैकडोनाल्ड, उमाकांत राय आदि।  इस फिल्म की शूटिंग छत्तीसगढ़ एवं मुंबई में की गई है। निर्माता सुरेश शर्मा ने फिल्म ‘हंसा-एक संयोग’ की कहानी के बारे में बताया कि छत्तीसगढ़ के एक बड़े ठाकुर परिवार में एक बच्चे का जन्म होता है, जो किन्नर है। इसका नाम है नामानुज, जिसे गुरु मां किन्नर (अखिलेन्द्र मिश्रा) द्वारा हंसा नाम दिया जाता है। ठाकुर परिवार के लोग हंसा को अपने परिवार में नहीं रखना चाहते, उसे वे गुरु मां के किन्नर समाज को सौंप देना चाहते हैं। परंतु उसकी मां ऐसा नहीं होने देती। वह उसे बेटे की तरह पालती है। बाद में हंसा के इस समाज में अस्तित्व को लेकर तमाम घटनायें विभिन्न मोड़ लेती हैं। किन्नर हंसा पर रेप का आरोप भी लगता है, फिर किस तरह हंसा की कहानी का अंत होता है, यही इसका मुख्य विषय है। 

संवाद प्रेषक: काली दास पाण्डेय


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