चर्चाओं के बीच:फिल्म पत्रकार अरुण कुमार शास्त्री - DIGITAL CINEMA

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चर्चाओं के बीच:फिल्म पत्रकार अरुण कुमार शास्त्री


देश की सबसे लोकप्रिय फिल्म पत्रिका 'मायापुरी' के अंक 2325 में प्रकाशित अपने आलेख 'चुनाव और हमारे फिल्म स्टार्स के मेरे निजी अनुभव और 2019 के लोक सभा चुनाव का परिदृश्य' को लेकर बॉलीवुड में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अरुण कुमार शास्त्री इन दिनों काफी चर्चा में हैं।चुनावी संदर्भ के साथ फ़्लैश बैक में जा कर वर्तमान के साथ भविष्य को भी जोड़ते हुए शास्त्री जी ने अपनी लेखनी से मायापुरी के श्वेतश्याम पन्ने को रंगीन कर दिया है।अभिनेत्री व कांग्रेस नेत्री उर्मिला मातोंडकर ने भी उनके आलेख को लाइक किया है।
साहित्य के सरोवर से शब्दों को निकाल कर अपने आलेखों में पिरोने की कला में माहिर अरुण कुमार शास्त्री 70 के दशक से ही मायापुरी प्रकाशन परिवार में संजीवनी बूटी की तरह शामिल हैं।70 के दशक में प्रकाशित हुए उनके आलेखों का पुनः21वीं सदी में क्रमवार प्रकाशित होना इसी बात का परिचायक है। 'मायापुरी' के उद्भव और विकास के साथ जिन लोगों ने अपना नाता आज तक जोड़ रखा है, वो सभी 'मायापुरी' के माध्यम से  अरुण कुमार शास्त्री के द्वारा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को दिए गए योगदान को भुला नहीं सकते... धीमी गति से चलते हुए फिल्म पत्रकारिता की परिभाषा को बदलने का प्रयास अरुण कुमार शास्त्री ने किया है ।भारतीय फिल्म इंडस्ट्री डिजिटल युग में प्रयोगात्मक दौर से गुज़र रही है वैसे समय में भी अरुण कुमार शास्त्री केवल अपनी शर्तों पे अपने बिंदासपन के साथ आज भी गतिशील हैं।'मायापुरी' के संस्थापक प्रकाशक व संपादक स्व ए.पी. बजाज के साथ शास्त्री जी के संबंध काफी मधुर थे  और आज भी 'मायापुरी' के वर्तमान संपादक प्रमोद बजाज(पी.के.बजाज) के साथ उनका रिश्ता भावनात्मक रूप से काफी गहरा है।
70 के दशक में फिल्म पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने वाले अरुण कुमार शास्त्री उम्र में 70 प्लस के हो चुके हैं और आज भी क्रियाशील हैं..उम्र के इस पड़ाव पर भी सेहतमंद हैं।फिल्मी कैरियर के बारे में पूछे जाने पर वो मुस्कुराते हैं और मोहम्मद रफी साहब का गाना गुनगुनाते हैं--
दिल का सूना साज़ 
तराना ढूँढेगा....
तीर-ए-निगाह-ए-नाज़ 
निशाना ढूँढेगा....!
मुझको मेरे बाद 
ज़माना ढूँढेगा....!****


संवाद प्रेषक: काली दास पांडेय


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