चर्चाओं के बीच संगीतकार:अमरेश शाहाबादी - DIGITAL CINEMA

Header ads


चर्चाओं के बीच संगीतकार:अमरेश शाहाबादी


संगीतकार अमरेश शाहाबादी को निर्माता-निर्देशक अम्बेश यादव के द्वारा हिन्दी फिल्म-'अम्बू'  के लिए बतौर संगीतकार अनुबंधित किये जाने के बाद से बॉलीवुड में अमरेश शाहाबादी की काफी चर्चा हो रही है। नवोदित प्रतिभाओं को चांस देने में संगीतकार अमरेश शाहाबादी अग्रणी माने जाते हैं। संगीत तो उनकी रगों में बचपन से ही है। अपने पिता स्व लक्ष्मण शाहाबादी(गीतकार/संगीतकार) से प्रभावित अमरेश ने शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा ली, तब जाकर अपना व्यावसायिक कैरियर आरंभ किया। अमरेश शाहाबादी ने आठ वर्षों तक पं. दामोदर शरण से भी शास्त्रीय संगीत सीखने के पश्चात्  ‘‘प्रयाग  संगीत  समिति’  से  संगीत  प्रभाकर  की  उपाधि  हासिल  की  है। पिता स्व लक्ष्मण  शाहाबादी  गीत-संगीत  दोनों  के  ही  विलक्षण  रचयिता  थे,  दादा रामलाला प्रसाद सिद्धहस्त सितार वादक थे।गीतकार/संगीतकार स्व लक्ष्मण शाहाबादी की तरह अमरेश को भी आंचलिक व पारंपरिक संगीत से विशेष लगाव रहा है। वह भोजपुरी तथा हिन्दी लोकगीत एवं फिल्म संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखते हैं। एक ओर जहां वह उदित नारायण, अल्का याज्ञनिक, साधना सरगम, विनोद राठौड़, कल्पना और उषा मंगेशकर जैसे वरिष्ठ गायक-गायिकाओं को अपने संगीत निर्देशन में गंवाया, वहीं और  उभरते कलाकारों  को  भी  खूब  प्रोत्साहन  किया।  मोहन  राठौड़,  आलोक  कुमार,  प्रियंका सिंह, प्रियंका मौर्या, आव्या दुबे आदि को अमरेश ने बेहतर गाने का अवसर दिया। भोजपुरी फिल्मों में भी कर्णप्रिय संगीत के लिए अमरेश शाहाबादी को बुलाते हैं। कुछ भोजपुरी फिल्में इसका जीवंत उदाहरण हैं। ‘फुलवा से महके अंगना हमार’, ‘सईंया अनाड़ी बा हमार’, ‘माई के कर्ज’, ‘मधुबाला’ आदि फिल्मों में अमरेश का संगीत समां बांधता है। अभी हाल ही में छठी मइया के गीतों के मेला में अमरेश द्वारा रचित छठ गीत अपनी अलग पहचान लिए हुए था। हिन्दी में फिल्म निर्माता/निर्देशक की  ‘झांसी की रानी लक्ष्मी बाई’ आयी। फिल्म-‘तराना’ संगीतकार अमरेश शाहाबादी की आने वाली फिल्मों में से एक है।

संवाद प्रेषक: काली दास पाण्डेय


No comments