ज़िन्दगी और मौत के दंगल से बाहर निकले राजू कारिया - DIGITAL CINEMA

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ज़िन्दगी और मौत के दंगल से बाहर निकले राजू कारिया


जीवन के सफर में किस मोड़ पर क्या होगा ये कोई नहीं जानता।संसार है एक नदिया... सुख दुख दो किनारे हैं ये सर्वविदित है।हाल के दिनों तक बॉलीवुड के चर्चित व विख्यात पीआरओ राजू कारिया भले चंगे थे।पिछले दिनों अचानक गैंगरीन का अटैक उनके बायें पैर में हुआ और डायबिटीज की वजह से संक्रमण फैलने लगा।काफी गंभीर अवस्था राजू कारिया मुम्बई से अमरावती पहुँचे।अमरावती  शहर के मशहुर डॉ.विजय  बखत्तार के होस्पिटल मे उन्हें भर्ती कराया गया। चार  घंटे  चले  इस  ऑपरेशन  को  डॉ. विजय  बख्तार  और  श्याम राठी  ने  अपने अन्य डॉक्टरों के साथ चार  घंटे तक अथक मेहनत करके  बायां पैर  काटकार  राजू कारिया की  जान बचाली। डॉ.विजय  बख्यतार  श्याम राठी  के  अलावा पूरी टीम का प्रयास सफल रहा।मेडिकल टीम में शामिल लोगों में डॉ. सुयोग राठी ,डॉ आशिश भट्ट, डॉ .सुनील शर्मा , डॉ ,ज़ाकिर खान  डॉ अंजुम  नाज ,ऊमेश नाईक डॉ ,विक्की  पिंजानी डॉ  शोहेब शेख ,अक्षय  तांबोले ,भाग्यश्री ,माधुरी व्  रूपेश महल्ले   हेमांत  प्रशिक , भीमटे  स्वपनील  गाडलिंग के नाम उल्लेखनीय हैं।चिकित्सक टीम के प्रयास से राजू कारिया की  जान  तो बच गई  लेकिन 
लेकिन उनको अपना बायां पैर  हमेशा के  लिये गवांना पडा जो की राजू कारिया के लिए अपूरणीय क्षति है।फिलवक्त ज़िन्दगी और मौत के दंगल से बाहर निकल चुके हैं राजू कारिया।
90 के दशक में बॉलीवुड में बतौर पीआरओ/फिल्म प्रचारक राजू कारिया ने धमाल मचाते हुए अपना एक क्षेत्र राज कायम किया और पीआरओशिप की परिभाषा भी बदल कर दिखाया और एक नया मिसाल कायम करने में कामयाब रहे। अक्षय कुमार , गोविन्दा ,संजय दत्त, रोनित  रॉय और सोनू  निगम  के पर्सनल पीआरओ व सैकडो फिल्मों के प्रचारक रह चुके राजू कारिया का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक में भी दर्ज़ है और उन्हें राष्ट्रपति अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।


संवाद प्रेषक: काली दास पाण्डेय



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